SUPAUL:पत्रकारिता सिर्फ एक व्यक्ति से की गई उम्मीद से नहीं चलती सिस्टम और संसाधन से चलती।

सुपौल:- जिले के त्रिवेणीगंज एक ऐसा कंलकित बन गया है,जो पत्रकारिताह इन पत्रकारिता करने को बखूबी से जान रहे हैं लेकिन किसी अधिकारी के हिम्मत नही होती है, बहरूपिया पत्रकार के सामने कुछ बोल सके।इसकी सबसे बड़ी वजह है, दोनों की मिलीभगत कार्यालय चल रहे हैं, अंधेरगर्दी है कि जिन्हें कलम पकड़ना भी नहीं आता वो पत्रकार का मुखौटा लगाकर पत्रकारिता के नाम पर धंधेबाजी कर रहे है। पदाधिकारी पर कब्जा जमाने के लिए उसमें कुछ पत्रकारिता की झुंड बनाते हैं, जो पत्रकारिता के आड़ में उगाही करते फिरता है, वैसे हम ये कतई नही कह रहे हैं कि झुंड में सारे पत्रकार अवैध वसूली करता है, उसमे ईमानदार भी है,और इन्ही ईमानदार पत्रकार के सहारे पत्रकारिता चल रहा है, पत्रकारिता का दहशत फेलाने के लिए खुद का अध्यक्ष, सचिव बनाते झुंड में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं है, उस झुंड की फाइल ढोने वाला वाला एक पद दे देते हैं, इतना ही नहीं झुंड में एक अधिवक्ता भी है, जो पुर्व में फर्जी सर्टिफिकेट पर शिक्षक बन, कई सालों तक सरकारी पैसा का लाभ लिया। बिहार मुखिया नितिश कुमार द्वारा आदेश निर्गत हुआ था कि जितने भी फर्जी शिक्षक बन बैठे हैं. कृपया खाली कर दे, नही तो कार्रवाई की जाएगी। मौके देख फर्जी मास्टर साहब फरार हो गया, कुछ दिन के बाद अब अधिवक्ता बन गया है, अब किया पता अधिवक्ता करने का सर्टिफिकेट सही है, या फर्जी यह भी संदेह के घेरे में है।उसके बाद पत्रकारिता झुंड का सदरार बन गया जो गिरगिट की तरह रंग बदलते रहते हैं,ऐसे हम नही कह रहे हैं,कि फर्जी सर्टिफिकेट पर अधिवक्ता करते है, पुर्व के भाति अनुमान लगाया जाता है, कि जबकि फर्जी सर्टिफिकेट पर मास्टर बन बैठे थे ,तो अधिवक्ता भी फर्जी सर्टिफिकेट पर करता होगा।अब नौबत यहां तक आ गई है कि सरकार और गैर सरकारी व्यवसायिक संस्थायें ब्लैकमेलिंग वाली पत्रकारिता से बचने की तरकीबों पर काम करने लगे हैं। अब पदाधिकारी के चंबर में जाने पहले मुबाइल बाहर रख रख देने की सलाहियत देते है ,कुछ लोग पत्रकारिता के आड़ में अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है! पत्रकारिता को सबसे ज्यादा कलंकित कर रही कुछ लोग पदाधिकारी का वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग के जुगाड़ में रहते हैं, ताकि कि मोटी माल मिले।इसकी सबसे बड़ी वजह है कि पत्रकारों का इकबाल नहीं रहा। इनका रसूक़, सम्मान और गुडविल खत्म होती जा रही है।

बिहार प्रभारी गजेन्दर यादव की रिपोर्ट।

 

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