औरंगाबाद: बढ़ती महंगाई को लेकर आम लोग परेशान।

औरंगाबाद: लगातार बढ़ती महंगाई से समाज का हर तबका परेशान है। हींग से लेकर हल्दी और नून-तेल से लेकर आटा तक के भाव बढ़े है। रसोई गैस की कीमते हर माह बढ़ रही है। लिहाजा किचेन का बजट गड़बड़ा जा रहा है। इसे लेकर गृहिणियां बेहद परेशान है। प्राइवेट स्कूल वाले भी फी बढ़ाने में पीछे नही है। ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षकों ने भी फी बढ़ा दी है। डीजल-पेट्रोल की कीमत में प्रायः हर दिन हो रही वद्धि हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ाने में लगी है। महंगाई से राहत पाने का लोगो को उपाय नही सुझ रहा है। लिहाजा लोग ख़ुद को महंगाई से राहत दिलाने के लिए अपनी वस्तु एवं सेवाओं के दाम बढ़ाने में लगे है। सरकार किसानो की आय दोगुनी करने की बात और प्रयास कर रही है लेकिन आम अवाम की आय को बढ़ाने की बात नही हो रही है। ऐसे में आम अवाम दुश्वारियां झेल रहा है। अवाम को सब्जी से लेकर किराना-कपड़े खरीदने और बच्चों की पढ़ाई तक पर ज्यादा खर्च करने पड़ रहे है। सरसो तेल, रिफाइंड आयल, दाल के दाम आसमान छू रहे है। मौसमी सब्जियों के कभी ज्यादा उत्पादन होने से भाव थोड़े नीचे गिर रहे है। इससे लोगो को चंद दिनों की राहत मिलती है पर फिर कीमते बढ़ने से परेशानी बढ़ जा रही है। लिहाजा कही से राहत नही मिलने पर लोग अपने रोजमर्रा के खर्चों में कटौती करने में लगे है लेकिन कटौती करने के बावजूद उन्हे राहत नही मिल पा रही है। वही विशेषज्ञ मानते है कि महंगाई अब एक राजनीतिक शब्दावली बन गई है। कोई भी दल विपक्ष में रहने पर महंगाई के लिए सत्ता पक्ष को जिम्मेवार ठहराता है और वादा करता है कि वे सरकार में आने पर महंगाई को काबू में करेंगे। इसके बावजूद होता उल्टा है और विपक्ष के लोग भी सत्ता में आने के बाद महंगाई को काबू में नही कर पाते है और वे भी महंगाई के मामले में पहले वाले सत्ता पक्ष की ही भाषा बोलने लगते है। विशेषज्ञ मानते है कि कोई भी सरकार महंगाई को नियंत्रित नही कर सकती है लेकिन ऐसा नही है कि इसका समाधान नही हो सकता है। सरकार आम अवाम की आमदनी बढ़ाने और उनकी क्रय क्षमता को बढ़ाने के प्रयास जरूर कर सकती है। सरकार यदि इस तरह का प्रयास करती है तो निःसंदेह अवाम को राहत मिल सकती है।

औरंगाबाद से धीरेन्द्र पाण्डेय

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