SUPAUL:समाजिक सरोकार की बजाय मुद्दों से भटक रही पत्रकारिता। प्रशासन कार्रवाई के बदले देख रहे हैं तमाशा

TRIVENIGANJ/SUPAUL:दर्पण टूटने से घर परिवार पर कोई बहुत बड़ा संकट आने वाला यह बात हमने बुजुर्गों से सुनी और इन इलाकों में आज भी इन मान्यताओं से हम अछूते भी नही।कथन के संदर्भ में हमे टूट दर्पण को तुरंत घर से हटा देना चाहिए ताकि किसी का अक्स दर्पण में ना दिखाई पड़े ऐसे बहुतेरे लोग इसे अनदेखा भी कर देते हैं, इसी तरह जिले के सबसे बड़े अनुमंडल त्रिवेणीगंज में अपनी कारगुजारियों से चर्चा के केंद्र बिंदु में रहे पत्रकार बड़े बड़े चैनलों में इतनी बड़ी आबादी त्रिवेणीगंज को फर्जी खबर दिखाकर समाज को आईना दिखाते है।समाचार की गुणवत्ता और इसकी सच्चाई समाज पर असर डालती है लेकिन हासिये पर पत्रकारिता को लाने वाले पत्रकार के बिरुद्ध गोलबंद होती आवाज ने सिद्ध कर दिया गया की सच्चाई को झुठलाया नही जा सकता और किसी निर्दोष को फंसाया नही जा सकता। टूटे हुए दर्पण की तरह इन कुख्यात पत्रकारों को उखाड़ कर फेंकना होगा ,जैसे कांच की दर्पण बहुत ही मायने रखता है दर्पण टूटने से घर परिवार पर कोई बहुत बड़ा संकट आने की संकेत करता है, इसी तरह त्रिवेणीगंज के कुख्यात पत्रकार त्रिवेणीगंज वासियों को संकेत दे रहा कि हमें जल्द उखाड़ कर फेंक दीजिए, क्योंकि पत्रकारिता देश का चौथा स्तंभ होता और पत्रकार आमलोगों से लेकर अधिकारी तक को सही रास्ते पर चलने के लिए आईना की तरह उन्हें आगे रास्ता भी दिखाता है, आखिरकार तथाकथित कुख्यात पत्रकार मंसूबे क्या है, समाज में विद्रोह पैदा करें ,समाज में भाईचारा को खत्म करें ,अधिकारी अच्छे से काम नहीं करें, आम लोगों को अपने हक और न्याय नहीं मिले, आखिर क्यों झूठी खबर फैलाई जाती है, इसके बावजूद भी वरीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए मौन धारण किए हुए,जो अधिकारी खुद करते हैं कि फर्जी खबर है, वह अधिकारी की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं, ऐसा तो नहीं कि पदाधिकारी अपने दिन काटने के लिए कार्यालय में जमे हुए हैं अगर हम कुख्यात पत्रकारों के सामने कुछ बोले तो मेरा नौकरी खतरा में चले जाएगा, अगर आप किसी को हक नहीं दिला सकते हैं तो बंद करिए आप अपने कानून की चौखट को इतना ही नहीं अच्छे पदाधिकारी जो निष्पक्ष अपने कर्तव्य निभाते हैं, कुख्यात पत्रकारों की चपेट में आ रहे हैं,उनके जीवन से खिलवाड़ की जा रही है, उनकी छवि को धूमिल किया जा रहा है , जिम्मेदार पदाधिकारी सिर्फ तमाशा देख रहा है, हालही दिनों में सोचे समझे साजिश के तहत आपसी लेनदेन में प्रखंड विकास पदाधिकारी का मौका परस्त पत्रकार ने विडिओ बना लिया दो साल भर बाद उस विडिओ को वायरल कर दिया गया क्योंकि विडिओ जिनसे ताल्लुक़ रखता है उन्होंने उन मुताबिक कार्य नही किया। महिला पदाधिकारी होने के नाते लगातार प्रताड़ित करता रहा उन तथाकथित लोगों को जी नहीं भरा तो उनका वीडियो वायरल कर दिया, जबकि लेनदेन करने वाले खुद बता रहे हैं कि उनसे हमारे घरेलू तताल्लुकात है आपसी लेनदेन अपराध नहीं है, हद तो इस बात की है कि जिलाधिकारी वायरल वीडियो की जांच के लिए आदेश कर दिए, सवाल जिला अधिकारी से हैं कि लगातार कुख्यात पत्रकारों के द्वारा फर्जी खबर परोसा जा रहा है जबकि आप ने त्रिवेणीगंज प्रखंड की औचक निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस के कारण हुई एक युवक की मौत के बारे में पूछे जाने पर कहे फर्जी खबर है, बावजूद भी कार्रवाई नहीं होना, डीएम साहब कहां है आपकी कानून, आखिर कौन देगा इसका जवाब। आरोप यह भी है एक बड़े चैनल का रिपोर्टर बनकर आखिर धोष क्यों जमा रहा है क्या प्रशासन की जमीर इतना मर चुका है, इनके ऊपर कारवाई नहीं हो रहा है, कब्रिस्तान से तीन मुर्दा फरार होने की खबर बड़े-बड़े चैनल और अखबारों में प्रकाशित किए गए, खबर देखते ही पदाधिकारी की पसीना छूटने लगे खबर ऐसा था कि जिससे दो समुदाय के बीच हिंसा भी हो सकती थी, खबर प्रकाशित होने के तुरंत बाद एसडीओ त्रिवेणीगंज एसजेड हसन ने मीडिया को खुलकर बयान दिया कहा कब्रिस्तान वाला खबर सरासर गलत है कोई मुर्दा फरार नहीं हुआ फिलहाल निगरानी के कब्रिस्तान के उक्त स्थल पर चौकीदार प्रतिनियुक्त किए गए थे ,लगातार फर्जी खबर परोसने में कुख्यात पत्रकार की बड़ी भूमिका रही है, समझ से परे है बिना सत्यापन की पुष्टि करने के बिना एकतरफा न्यूज़ कैसी पत्रकारिता है, इस तरह की पत्रकारिता से पत्रकार बिरादरी बदनाम हो रही है, वही समाज में नकारात्मकता फैलती जा रही है समाज को अच्छे दिशा दिखाने वाले कुख्यात पत्रकार समाज को गड्ढे में धकेल रहे, इन सब के बीच कौन है जिम्मेवार। आखिर पर्दे के पीछे कौन है उनकी गिरेबान तक पदाधिकारी के हाथ जाने से डरते हैं

क्या कहते है, कानून के जानकार

बताते हैं कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ आईपीसी के तहत केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार (Arrest) किया जा सकता है. अगर कोई शख्स दो समूह, धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, रिहायश या भाषा के नाम पर नफरत फैलाता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा-153ए के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. अगर कोई व्‍यक्ति बोलकर, लिखकर या इशारे से या फिर किसी दूसरे तरीके से सांप्रदायिक सौहार्द्र (Communal Harmony) बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जा सकता है. ऐसे लोगों के खिलाफ आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया जा सकता है. गैरजमानती अपराध(Non-Bailable Offense) होने के कारण पुलिस को आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करने की छूट होती है. इस मामले में दोषी पाए जाने पर तीन साल तक कैद (Imprisonment) की सजा हो सकती है. साथ ही कोर्ट दोषी पर जुर्माना (Penalty) भी लगा सकता ।
अब लोगों का मानना है इसका जिम्मेवार सिर्फ प्रशासन है,

        बिहार प्रभारी गजेंद्र यादव की रिपोर्ट

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