त्रिवेणीगंज में आरोपी को बचाने के लिए अपने ही थाने मे दर्ज रिकॉर्ड को छिपाने में जुटे हैं पुलिस।

SUPAUL: एक तरफ प्रदेश सरकार आम लोगों को न्याय दिलाने के लिए नित नये कानून बनाकर न्याय मिलने का दावा कर रही है, लेकिन जिले के त्रिवेणीगंज में यहां तो कुछ उल्टा ही हो रहा है, जिस व्यक्ति ने बीते 27 जनवरी 2022 को पीडित के साथ बीच बजार में स्टेंट बैंक समीप बेरहमी से मारपीट की और पुलिस पहले पीड़ित का एफआईआर दर्ज की उसके तीन दिन बाद आरोपियों से आवेदन लेकर पीड़ित पर बिना जांच के ही एफआईआर दर्ज कर लिया। कांड संख्या 44/22 पीड़ित ने की और आरोपी के तरफ से पीड़ित पर 43/22 दर्ज की। जबकि घटना की सीसीटीवी कैमरा साक्ष्य है.पीड़ित थाना प्रभारी और डीएसपी के सामने गिड़गिड़ाते रहें कि एक बार इस घटना की फुटेज जांच कर लिया जाए। जो दोषी है उन पर कार्रवाई की जाएं लेकिन कोई अधिकारी पीड़ित की बात को सुनने को तैयार नहीं था।  जिस समय घटना घटी उसके बाद थाना प्रभारी संदीप कुमार सिंह के द्वारा दूरभाष पर कहा कि बैंक से फुटेज मांगवा लिया गया है. फुटेज की जांच की जा रही है। जिसका ऑडियो आपको आगे की खबर में सुनाया जाएगा. उसके बाद भी काउंटर केस हो गया। हैरानी की बात यह है कि आज तक उक्त धटना की फुटेज नहीं दिखाई।

पुलिस की महिमा अपार अपना ही थाने के रिकॉर्ड से अंजान हैं केस इंचार्ज

केस की जिम्मा संभाल रही मनीषा चक्रवर्ती ने कांड संख्या 44/22 की चार्जशीट में लिखते हैं कि दीपक कुमार यादव के खिलाफ त्रिवेणीगंज थाने में एक भी मुक़दमा दर्ज नही है। मनीषा चक्रवर्ती के द्वारा दिपक कुमार यादव को क्लीन चिट दे दिया गया. मनीषा चक्रवर्ती भूल गये कि त्रिवेणीगंज थाना कांड संख्या 232/20 में दीपक कुमार यादव पिता रिटाईर फोजी प्रेमलाल यादव अभियुक्त है. जो संगीन धाराओं में दर्ज है.अब उठता है कि जिस पुलिस कर्मी को पुलिस की मैनुअल का जानकारी नही है तो किन स्थिति में केस की अनुसंधान का जिम्मा सौपा गया है या आरोपी को बचाने के लिए इस तरह के हथकंडा अपना रहे हैं या तो फिर केस अनुसंधानकर्ता को पुलिस की मैनुअल की जानकारी नहीं है. जिस आरोपी पर उन्ही के थाने में केस दर्ज है उस आरोपी के बारे में लिखा जाता है कि त्रिवेणीगंज थाने में एक मुकदमा दर्ज नही है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं. किस तरह से त्रिवेणीगंज थाने में न्याय की डोर चल रहा हैं जिस थाने से लोग न्याय की उम्मीद रखते हैं लोग न्याय की मंदिर समझते हैं. उस थाने जब अन्याय की ओर जाए तो फिर इसे क्या कहा जा सकता है। इस बाबत पीड़ित ने बताया कि सिर्फ मेरा कसूर यह था कि लगातार हमने सच्चाई के साथ खबर प्रकाशित  करता रहा. इसी कारण मुझे आज यह दिन हमें देखने को मिल रहा है पुलिस अंधा हो सकते हैं लेकिन न्यायालय अंधे नहीं हो सकते है. हमें न्यायालय पर भरोसा है मुझे न्याय जरूर मिलेगा।

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