जय हो मनरेगा : खबर के बाद भी बेअसर चार दिन बीत जाने के बाद नहीं हुई स्थल का जांच ना की कोई कार्रवाई। जिम्मेदार अधिकारी बने मुख दर्शक।

त्रिवेणीगंज (सुपौल) : महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा। सरकार की ये योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। रोजगार की गारंटी हो ना हो लेकिन भ्रष्टाचार की पूर गारंटी है। बिना काम के ही प्रखंडस्तरीय पदाधिकारी व पंचायत प्रतिनिधि की मिलीभगत से लाखों का गोलमाल खुलेआम चल रहा है। निगरानी की व्यवस्था तो जरूर है लिकिन तमाम तरह की निगरानी के बाद भी मनरेगा में धांधली धड़ल्ले से जारी है। जिलास्तरीय पदाधिकारी सरकारी आंकड़ों को ही सच मानकर काम कर रहे हैं जबकी हकीकत उलट है। खबर प्रकाशित हुए चार दिन बीत जाने के बावजूद भी कार्यस्थल की ना तो जांच हुई नाही संलिप्तता कर्मी और जनप्रतिनिधी पर कार्रवाई हुई। जिसको लेकर मनरेगा पदाधिकारियों पर सवाल उठने लगी है. बीते दिनों प्रखंड क्षेत्र के कोरियापट्टी पश्चिम पंचायत के मध्य विद्यालय परवाहा परिसर में  मिट्टी भराई कर सोलिंग का काम किया जाना था। जो मुखिया रमान्द यादव एवं बिचौलिया के द्वारा मनरेगा योजना से मिट्टी भराई कार्य ट्रैक्टर से किया गया था। जिसकी प्राक्कलित राशि एक लाख उन्तीस हजार की है.जबकि कोरियापट्टी पश्चिम पंचायत के रोजगार सेवक मणिकांत ने भी स्वीकार किया है. यह योजना ट्रैक्टर से की गई। जिसकी खबर भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। हैरत की बात यह जिम्मेदार अधिकारी खबर प्रकाशित होने के बाद भी कार्यस्थल की जांच तक नहीं की। कार्रवाई तो दूर की बात है मनरेगा पीओ तो जांच की बात कह कर अपना पल्ला तो झाड़ लिए शायद इसलिए मीडिया में लगातार आ रही गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की खबरों और लोगों की शिकायत को नजरअंदाज कर सके। कार्रवाई के नाम पर अधिकारी महज जांच करवाएंगे या दिखावा रहे हैं का रटा रटाया जवाब देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं.बड़ी उम्मीद था केंद्र सरकार की सबसे महत्वकांक्षी योजना हर मजदूरों को रोजगार मिले। इसको लेकर मनरेगा योजना के तहत लेबर कार्ड बना कर पंचायत में कार्य कराकर मजदूरों को रोजगार देना है, लेकिन उसकी जमीनी हकीकत आप भी देखेंगे तो हैरत में पड़ जाएंगे। आखिर ऐसे में कई सवाल उठता है कि क्या सच में त्रिवेणीगंज प्रखंड में मनरेगा मजदूरों के लिए फायदेमंद है? या फिर सिर्फ जनप्रतिनिधी व अधिकारियों का यह जेब भर रहा है। ग्रामीणों की अगर मानें तो हरेक योजनाओं की जांच जन प्रतिनिधियों, ग्रामीणों और मीडिया के समक्ष होनी चाहिए जिससे मामला कभी रफा दफा न हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। इस तरह की जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी के भरोसे सरकार की महत्वकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए मंशा पूरी हो पाएगी। जबकि इस योजना में सत्य प्रतिशत मजदूरों को काम देने के लिए सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर लाया गया है। सैकड़ों हजारों मजदूरों को इस योजना में कार्य करने के लिए जॉब कार्ड बनाया गया है। बावजूद ऐसे लोगों को कार्यो से वंचित रखा जा रहा है. इस मामले को लेकर एक बार पुनः मनरेगा पीओ से जानकारी लेने का प्रयास किया लेकिन मनरेगा पीओ फोन रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं अब देखना दिलचस्प होगा कि वरीय अधिकारी इस मामले को लेकर किस तरह से संज्ञान ले रहे हैं.

त्रिवेणीगंज से अखिलेश कुमार आनंद की रिपोर्ट

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