त्रिवेणीगंज अंचल कार्यालय बना दलालों एवं बिचौलियों का अड्डा।

सुपौल: जिले के त्रिवेणीगंज अंचल कार्यालय में इन दिनों दलालों एवं बिचौलियों का अड्डा बना हुआ है। अंचल कार्यालय कर्मी के तानाशाह रवैये के कारणआए दिन भु स्वामी को परेशानी का सामना करना पड़ता है,सीओ दिनेश प्रसाद प्रति दिन बीमार बताकर कार्यालय से गाबय रहते है. और आरो साहब सीआई के पद है कहते है मुझे पावरे नही है जिसको लेकर भु स्वामी को किसी कार्य को ले दलालों का सहारा लेना पड़ता है.कुछ भु स्वामी ने बताया कि अंचल कार्यलय में दिये हुए आवेदन भी गायब हो जाते हैं. पैसा देने पर गायब आवेदन जगह पर पहुंच जाते हैं.खासकर निजी लोग अंचल कार्यलय का ज़िम्मा संभाल रहे हैं. बताया अंचल कार्यलय में पदस्थापित कोई भी हल्का कर्मचारी चिन्हित जगहों पर नही बैठते है. एक हल्का कर्मचारी को पांच – पांच मुंशी रहते हैं हल्का कर्मचारी के बदले उनके नीजी मुंशी के द्वारा पैसा दे कर काम करना पड़ता है.जमीन की दाखिल-खारिज के लिए कई साल से लगातार अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे है.लेकिन फिर भी उक्त जमीन का दाखिल-खारिज नही हो पाई है। जबकि दाखिल-खारिज करवाने के नाम पर अंचल के बिचोलिये मोटी रकम की मांग की जाती है.अंचल कार्यालय बिचोलिये- दलालों का अड्डा बना हुआ है। सीधे आवेदन लेकर आने वाले लोगों का काम आसानी से नही होता है। जो लोग अंचल कार्यालय कर्मी को सुविधा शुल्क देते है उनका काम किया जाता है, लेकिन ऐसा नही करने वालों को महीनों सालों दौड़ाया जाता है। या तो उनके आवेदनों पर ध्यान नही दिया जाता है या फिर अन्य बहाने बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है। सबसे अहम बात यह है कि एक कर्मचारी पांच – पांच मुंशी रखते हैं. यह सब कार्य अंचलाधिकारी के अधिनस्थ कर्मचारी के रूप में होता है। जाहिर है इन्हें वेतन सरकार तो देती नहीं है, भ्रष्टाचार कर ये लोग पैसे कमाते हैं और आम आदमी का काम बिना पैसे का होता नहीं है. हद तो यह है कि पूरे सरकारी कार्यालय का चाबी उन्हें सौंप देते हैं. ऐसे गैर सरकारी, गैर जिम्मेदर लोगों को सरकारी दस्तावेज से छेड़छाड़ करने का हक देना कैसे न्यायसंगत है। इन सारे सवाल पर अंचलाधिकारी दिनेश प्रसाद मौन हो जाते हैं तो दूसरी ओर जिले के अधिकारियों द्वारा भी संज्ञान नहीं लिया जाता है। इस बात को लेकर शिवसेना उत्तर बिहार प्रमुख रामदेव यादव गहरी नराजगी जताई।कहा लगातार सीओ और हल्का कर्मचारी की लापारवाही सामने आ रही है. उन्होंने कहा कि यहां गलत हो रहा है कर्मचारी नहीं बैठते हैं और कर्मचारी की घर पर अवैध तरीके से सारा काम किया जाता है यह सब कुछ गलत हो रहा है। हम मांग करते हैं कि कर्मचारी कम से कम चार दिन भी ऑफिस में आकर बैठे और पब्लिक की समस्या सुने उनका काम करें उन्होंने गैर सरकारी लोगों द्वारा कार्य किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्य सरकारी लोगों द्वारा किए जाते हैं अवैध तरीके से इन लोगों द्वारा कार्य किया जाना रजिस्टर से छेड़छाड़ किया जाना कतई उचित नहीं है.अब देखना यह होगा की इस तरह के बिजोलिया पर शासन- प्रशासन लगाम लगा पाते हैं या फिर इस तरह का खेल जारी रहेगा.

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