छठ पर्व के मौके पर घोड़ा रेस का आयोजन :एसडीओ हसन ने विजेता को प्रतीक चिन्ह देकर किया सम्मानित

सुपौल: जिले जदिया थाना क्षेत्र अन्तर्गत नंनदना परसा गढी दक्षिण पंचायत में छठ पर्व की शुभ अवसर पर मंगलवार को घोड़ा रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस घुड़दौड़ प्रतियोगिता में 50 घुड़सवारों ने भाग लिया. प्रतियोगिता में भाग लिए सभी घुड़सवारों को 25 चक्कर लगाने थे. जिसमें महथावा निवासी उपेन्द्र यादव के घोड़े ने सभी घोड़ों को पछाड़कर बाजी जीत ली। मिर्जापुर पंचायत निवासी एखलाक बाबु नामक घोड़े को दूसरा पुरस्कार मिला वही कुलानादं यादव मिर्जापुर निवासी के घोड़े को तीसरा पुरस्कार प्राप्त हुए .इस आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे घोड़ें की शोकिन त्रिवेणीगंज अनुमंडल एसजेड हसन ने सभी विजेता को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। घोड़ादौड़ देखने के लिए दूर-दूर से लोग आए थे. बताया जाता है कि यहा 2 वर्षों से मेले का आयोजन किया जाता है. संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी एस जेड हसन ने कहा कि विगत कुछ दशकों से घोड़ा पालन तथा घुड़सवारी में लोगों का रुझान धीरे धीरे कम होते जा रहा था लेकिन फैशन के दौर में तथा वेस्टर्न कल्चर के नजदीक आते हुए भारतीय संस्कृत तथा समाज में इसका यानी कि घुड़सवारी का कल्चर पुन: लोट आया है .घोड़ा रखना या घुड़सवारी करना ना केवल शौक का चीज रह गया है बल्कि इसका इस्तेमाल हॉर्स थेरेपी में भी किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा ऐसा दावा किया जाता है कि हर्ष थेरेपी में एक स्ट्रेस रिलीवर हार्मोन का स्राव होता है जो मनुष्य के स्ट्रेस को कम करता है तथा मनुष्य में प्रसन्नता लाता है। घोड़ा मनुष्य से सम्बंधित संसार का सबसे प्राचीन पालतू स्तनपोषी प्राणी है. यह काफी वफादार पशु है जो आज से नहीं बल्कि हमारे देश में प्राचीन काल से ही देश के कई राजघरानों में मौजूद है. पहले राजा-महाराजा घोड़ों का सबसे ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करते थे. जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा जीवन सवारी के साधनों में बदलाव होता गया और गाड़ियों, रिक्शे आदि का चलन बढ़ता चला गया. बाद में गाड़ियों के बाद भी उनका लगाव घोड़ों के प्रति कम नहीं हुआ. बेहतर नस्ल वाले घोड़ों को फौज में इस्तेमाल किया जाने लगा. घोड़े पालन का कार्य करते है और उनकी अच्छी तरह से देखरेख का कार्य करते है वह काफी अच्छी कमाई करते है. वह बेहतरीन नस्ल के घोड़ों को पालकर उनको घुड़सावरी के शौकीन, घोड़ों को खेल में आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं.यदि आपके पास “पर्याप्त भूमि – पर्याप्त समय ” उपलब्ध है तो आप घोड़े पालने का आनंद उठा सकते हैं। घोड़ों और इंसानों के बीच विकसित होने वाला भावनात्मक जुड़ाव बेमिसाल होता है। घोड़ा बहुत बुद्धिमान और भावुक पशु होता है.

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