सुपौल में मनरेगा पीओ समेत चार कर्मी सेवामुक्त:जेई पर कार्रवाई की अनुशंसा; शेड बनाए बगैर 36.29 लाख निकाले

सुपौल: जिले के राघोपुर प्रखंड में मनरेगा के तहत पशु शेड बनाए बगैर 36 लाख 29 हजार की निकासी मामले में गठित जांच टीम के द्वारा दोषी पाए जाने वाले मनरेगा के तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी समेत 4 कर्मियों पर ज़िला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है।तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी समेत 4 कर्मियों को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। सोमवार को सुपौल ज़िलाधिकारी कौशल कुमार ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि देवीपुर में मनरेगा योजना के तहत पशु शेड निर्माण में फ़र्ज़ी बिल का भुगतान संबंधी मामले की ज़िला स्तर से जांच दल गठित कर जांच कराई गई।बताया कि टीम द्वारा प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में संबंधित पदाधिकारी व कर्मी से कारण पृच्छा की गयी। उक्त संबंध में संबंधित मनरेगा कर्मियों द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण की समीक्षा की गयी।समीक्षा के बाद जांच टीम द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन एवं विभागीय निदेश के आलोक में राघोपुर प्रखंड के देवीपुर पंचायत में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन एवं भुगतान में अनियमितता बरतने वाले दोषी कर्मियों के विरुद्ध जिला प्रशासन के द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए निम्न मनरेगा पदाधिकारी व कर्मियों का अनुबंध रद्द करते हुए सेवा से मुक्त किया गया है। इनमें राघोपुर के तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी धीरज कुमार, तत्कालीन लेखपाल विवेक कुमार मंडल, तत्कालीन पंचायत तकनीकी सहायक धर्म प्रकाश मल्लिक व देवीपुर पंचायत के तत्कलीन रोजगार सेवक मनोज कुमार शर्मा पर गाज गिरी है।इसके अलावे उक्त मामले में दोषी तत्कालीन कनीय अभियंता ओम प्रकाश चौधरी, सम्प्रति जिला सीतामढ़ी के विरुद्ध जांच टीम द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन एवं विभागीय निदेश के आलोक में अनुशासनिक कार्रवाई करने हेतु उप विकास आयुक्त,सीतामढ़ी को अनुशंसा के साथ पत्र भेजा गया है।साथ ही मामले में दोषी तत्कालीन मुखिया बिन्दवाला गुप्ता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं दोषी तत्कालीन पंचायत रोजगार सेवक मनोज कुमार शर्मा के विरुद्ध सेवा मुक्त किये जाने के अतिरिक्त प्राथमिकी दर्ज कराने की भी कार्रवाई की जा रही है। जानकारी के अनुसार सुपौल के डीडीसी मुकेश कुमार के नेतृत्व में पशु शेड घोटाला मामले में राघोपुर प्रखंड के 9 पंचायत में एक साथ जांच टीम पहुंची थी।इसके बाद से मनरेगा विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मियों में हड़कंप मच गया था।कई वार्डों में मनरेगा योजना से बनने वाले 25 पशु शेड का भुगतान किया गया था। जिन पशु शेड का भुगतान किया गया था। उसमें 12 पशु शेड का जमीन पर नीव भी नहीं पड़ा था। विभागीय अधिकारियों ने फर्जी बिल बनाकर लाखों की राशि का भुगतान कर लिया था। नियम के अनुसार आवंटन आने के बाद पहले उस पंचायत का भुगतान किया जाता है। जिसका कम बकाया रहता है।लेकिन राघोपुर में इसका भी उल्लंघन किया गया।जानकारी अनुसार राघोपुर प्रखंड मनरेगा को करीब 1 करोड़ 74 लाख 56 हजार रुपए का आवंटन दिया गया था। जिसमें राज्य से बीते 26 अक्टूबर को उस राशि को खर्च करने का समय निर्धारित किया गया था। लेकिन मनरेगा पीओ ने मनमानी करते हुए 01 करोड़ 59 लाख केवल देवीपुर सहित 09 अन्य पंचायत को कर दिया. इसमें भी अधिक बकाया वाले पंचायत का भुगतान लंबित रख दिया गया।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now
               
हमारे  नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट , और सभी खबरें डाउनलोड करें
डाउनलोड करें

जवाब जरूर दे 

क्या आप मानते हैं कि कुछ संगठन अपने फायदे के लिए बंद आयोजित कर देश का नुकसान करते हैं?

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles

Back to top button
Close
Website Design By Bootalpha.com +91 84482 65129