सुपौल में भगवान भरोसे चल रहा है अस्पताल. ढेर वर्ष की बच्चे की इलाज के लिए भटकते रहे परिजन, नहीं मिला डॉक्टर तो जाना पड़ा निजी क्लीनिक।

सुपौल :- बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री भले ही बेहतरी के दावे किए जा रहे हो, परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर ही सरकार के सपने को ठेंगा दिखाने में लगे। ऐसा हम इस लिए कह रहे है बिहार में एक ऐसा समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है जो शाम होते ही डॉक्टर ड्यूटी से गायब रहते है। दरअसल यह समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुपौल जिले के पिपरा की है यहा प्रखंड क्षेत्र से इलाज कराने आए मरीज को घंटो इंतजार करना पड़ रहा है पिपरा के गोरियारी टोला निवासी जागो मुखिया ने बताया कि ढेर वर्ष की नाती को अचानक चमकी आने लगे तो आनन फानन में इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरा लाया जहां एक भी डॉक्टर और कंपाउंडर मोजूद नहीं था, जिसके बाद मरीज का स्वास्थ्य बिगड़ता गया और घंटो इंतजार के बाबजूद डॉक्टर या कंपांडर नहीं पहुंचे। तो बच्चे को इलाज को लेकर निजी क्लीनिक में ले जाना पड़ा इस बात को लेकर मरीज के परिजन आक्रोश में हैं, वहीं परिजन ने डाक्टर की पुर्जा पर अस्पताल की कर्मी से लिखवा लिया की डॉक्टर अभी ड्यूटी पर तैनात नही है। वही ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह की मामला कई बार हुई है और इसकी सूचना कई बार जिला प्रशासन को दिया गया है लेकिन इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा कोई सुध नहीं लेते हैं ।जिससे प्रखंड क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए निजी क्लीनिक जाना पड़ता है। प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक पिपरा से पूछा गया उन्होंने बताया डॉक्टर मिथिलेश कुमार सिंह का रोस्टर के अनुसार ड्यूटी था परंतु किसी काम से नही आ सके उसके बदले में डॉक्टर विभूति भूषण सहमति की गई थी उनको भी किसी मरजेंसी कार्य के कारण कुछ देर के लिए बाहर जाना पड़ा तत्पश्चात आ गए. लेकिन विलम से आए फिर जॉइनिंग किए. अस्पताल से कंपाउंडर गायब रहने के बारे में पूछा गया तो बताया पारा मेडिकल वर्कर रामकिशन सहनी पर कार्रवाई के लिए लिखा गया है. इन साहब के बातों से आप अनुमान लगा सकते हैं की स्वास्थ्य व्यवस्था किस हाल में दम घुट रही है.

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