मानवाधिकार का अर्थ विश्व में रहने वाले प्रत्येक मानव को प्राप्त कुछ विशेष अधिकार ,दानिश मिराज 

सुपौल: एक्शन एड एवं यूनिसेफ के तत्वाधान में उड़ान परियोजना के तहत जिल के त्रिवेणीगंज प्रखंड के राजकीय अम्बेडकर आवासीय बालिका उच्च विद्यालय त्रिवेणीगंज में मानव अधिकार बाल दिवस का आयोजन प्रखंड कल्याण पदाधिकारी नितीश तिवारी की अध्यक्षता में  आयोजित की गई साथ ही एक्शनेट के जिला समन्वयक दानिश मिराज ने मानव अधिकार पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी

मानवाधिकार दिवस का इतिहास

मानवाधिकार का अर्थ विश्व में रहने वाले प्रत्येक मानव को प्राप्त कुछ विशेष अधिकार जो विश्व को एक सूत्र में बांधते हों, हर व्यक्ति की रक्षा करते हों, उसे दुनिया में स्वतंत्रता के साथ जीवन यापन करने की छूट देते हों। किसी व्यक्ति के साथ किसी भी कीमत पर कोई भेदभाव न हो, समस्या न हो, सब शांति से खुशी- खुशी अपना जीवन जी सकें, इसलिए मानवाधिकारों का निर्माण हुआ। मानवाधिकार दिवस (सार्वभौमिक घोषणा का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है. लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। मानव अधिकार का मतलब मनुष्यों को वो सभी अधिकार देना है, जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं। यह सभी अधिकार भारतीय संविधान के भाग-तीन में मूलभूत अधिकारों के नाम से मौजूद हैं और इन अधिकारों का उल्लंघन करने वालों को अदालत द्वारा सजा दी जाती है। मानवाधिकार में स्वास्थ्य, आर्थिक सामाजिक, और शिक्षा का अधिकार भी शामिल है। मानवाधिकार वे मूलभूत नैसर्गिक अधिकार हैं जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि के आधार पर वंचित या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

भारत में मानवाधिकार

भारत में 12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया, जिसके बाद से मानवाधिकार आयोग राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्य क्षेत्रों में भी काम करता है। जैसे मजदूरी, HIV एड्स, हेल्थ, बाल विवाह, महिला अधिकार। मानवाधिकार आयोग का काम ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। हालांकि भारत में अगर मानवाधिकारों की बात की जाए तो यह साफ है कि आज भी बहुत सारे लोगों को मानवाधिकार के बारे में जानकारी ही नहीं है, जबकि वे उनके खुद के अधिकार हैं। पिछड़े हुए राज्यों एवं गांवों में जहां साक्षरता का स्तर थोड़ा कम है, वहां मानवाधिकारों का हनन होना आम बात है। ऐसे इलाकों में जिन लोगों के पास ताकत है, वे इनका पालन नहीं करते और सामान्य लोगों पर दबाव बनाते हैं। शहरों में जिन लोगों को मानवाधिकारों की जानकारी तो है लेकिन वे इनसे गलत फायदा भी उठा लेते हैं। भारत में नागरिकों को मिले मूल अधिकार 1. समता या समानता का अधिकार 2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 3. शोषण के विरुद्ध अधिकार 4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार 5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार 6. संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद भारत के नागरिकों के मौलिक कर्तव्य 1. देश के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं आदर करे 2. राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे 3. देश की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे 4. अपनी पूरी क्षमता से देश की रक्षा करे 5. भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे 6. हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका निर्माण करे 7. प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्धन करे 8. नागरिक अपने अंदर वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करे 9. नागरिक सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे 10. सामूहिक एवं व्यक्तिगत गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे। इस बैठक मे प्रखंड समन्वयक पंकज कुमार, प्रधानाचार्य विद्यानंद मण्डल जी, शिक्षक टार्जन मण्डल,, रिकी कुमारी, रेखा देवी, सुरेन्द्र कुमार पाठक, आदि लोग उपस्थित थे !

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now
               
हमारे  नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट , और सभी खबरें डाउनलोड करें
डाउनलोड करें

जवाब जरूर दे 

क्या आप मानते हैं कि कुछ संगठन अपने फायदे के लिए बंद आयोजित कर देश का नुकसान करते हैं?

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles

Back to top button
Close
Website Design By Bootalpha.com +91 84482 65129