मजदूरों में आक्रोष : मनरेगा योजना में मजदूर के बदले जेसीबी से किया जा रहा है काम, बचने बचाने में जूटे हैं मनरेगा जेई

बिहार के सुपौल में मनरेगा विभाग के अधिकारियों की लापरवारी आए दिन देखने को मिल रही है. एक बार फिर योजना अंतर्गत चल रहे कार्य को जेसीबी मशीन द्वारा अंजाम दिया रहा है, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानि मनरेगा के खिलाफ़ है. इस वीडियो को देखने के बाद आप यही कहेंगें कि सम्बंधित अधिकारीयों को ज़मीनी हकीक़त से कोई मतलब ही नहीं है.मामला सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरियापट्टी पश्चिम वार्ड संख्यां दो की है. जहां मनरेगा योजना से पुल निर्माण की खुदाई जेसीबी मशीन से करवाइ जा रही है. जबकि कार्यस्थल पर कहीं भी डिस्प्ले बोर्ड नहीं लगाया गया है.यह योजना लगभग 10 लाख रूपये लागत की बताई जा रही है, इतना ही नहीं ग्रामीणों की माने तो इस पंचायत में मनरेगा योजना से किए गए कार्य की अगर जांच की जाए तो बहुत बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है. कहते हैं कि अगर कोई ग्रामीण इसकी शिकायत करता है तो जांच के नाम पर लीपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है. और यह लूट खसोट अनवरत चलता रहता है. मामले को लेकर कोरियापट्टी पश्चिम पंचायत के रोजगार सेवक मेराज आलम से पूछा तो उन्होंने बताया कि दो दिनों से पंचायत नहीं गए हैं. इस बात की मुझे जानकारी नहीं है. मनरेगा जेई से पुछा गाया तो उन्होंने पहले तो इस बात को खूब घुमाने का प्रयास किया, उसके बाद बताया कार्य को बंद कर दिया गया है. बीना सूचना के ही कार्य करवाया जा रहा था. हैरानी की बात यह है कि अभियंता कार्य स्थल का निरीक्षण किए बिना ही काम पास कर देते हैं.इस तरह वरीय पदाधिकारी की आंखों में धूल झोंक कर मनरेगा योजना के साथ-साथ मजदूरों की रोटी भी से खिलवाड़ कर कर्मी व जनप्रतिनिधि चांदी काट रहे. लेकिन ग्रामीणों के अनुसार कार्य अभी भी धड़ल्ले से जारी रही है. अब सबसे बड़ा सवाल है कि जब जेसीबी मशीन से खुदाई हुई हैं तो पंचायत रोजगार सेवक और जेई को इसकी जानकारी क्यों नहीं है. इसे विभागीय पदाधिकारियों की मिली भगत कहें या संवेदनहीनता. मजे की बात यह है कि वरिय अधिकारी उसे ही जांच का जिम्मा दिया जाता है.जैसे बिल्ली से दूध की रखवाली कराने का फैसला.जिसके कारण गरीबों-मजदूरों के पेट पर लात मारी जा रही है. अब सवाल यह भी उठता है क्या इस तरह के जनप्रतिनिधि एवं मनरेगा कर्मी भरोसे सरकार की महत्वकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए मंशा पूरी हो पाएगी। जबकि इस योजना में सत प्रतिशत मजदूरों को काम देने के लिए सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर लाया गया है। सैकड़ों हजारों मजदूरों को इस योजना में कार्य करने के लिए जॉब कार्ड बनाया गया है। बावजूद ऐसे लोगों को कार्यो से वंचित रखा जा रहा है। इससे पूर्व भी उसी पंचायत के मध्य विद्यालय परवाहा में मनरेगा योजना के तहत ट्रैक्टर से मिट्टी भराई का कार्य किया जा रहा था. खबर प्रकाशित होने के बाद कार्य को बंद कर दिया गया. लेकिन एक भी लोगों पर कार्रवाई नहीं है इससे आप अनुमान लगा सकते हैं.अब देखने वाली बात होगी इस पूरे मामले में किस तरह की कार्रवाई होती है या मामले को ठंडे बस्ते में डाल लीपापोती की जाती है.

सुपौल से सोनू आलम की रिपोर्ट

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