सुपौल में कड़ी सुरक्षा के बीच सम्पन्न हुआ मुहर्रम एसडीओ व डीएसपी ने संभाली मोर्चा

सुपौल : जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र में शहादत का दो दिवसीय पर्व मुहर्रम शांतिपूर्ण व भाईचारे के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुआ, इस मौके पर क्षेत्र में कई स्थानों पर मेले का आयोजन किया गया।जिसको लेकर प्रखंड स्तरीय अधिकारी से लेकर सुरक्षा को तैनात किए गए जवान व दंडाधिकारी पर्व को देखते हुए सतर्क व चौकस दिखे, क्षेत्र के विभिन्न मुस्लिम समुदायों मोहल्ले से ताजिया जुलूस निकाला, जुलूस आज दूसरे दिन शाम तक जारी रहा। जुलूस में शामिल लोगों ने हाथों में अलम लहराते हुए हजरत इमाम हसन हुसैन की याद में या हसन या हुसैन या अली सहित अन्य नारे लगा रहे थे ,जिसके साथ चल रहे लोग विभिन्न तरह के खेल-करतब दिखाते हुए अखाड़े पहुंचे,जहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती रही। युवक, बच्चे सभी काफी उत्साहित होकर जुलूस में शामिल हुए थे,एक से बढ़ कर एक ताजिया का निर्माण किया गया था जो देखने के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।अखाड़ों में इस बार शासन की गाइडलाइंस के अनुसार मुस्लिम समुदाय ने लाठी,डंडों से एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करतब दिखाए। मोहर्रम के जुलूस में भारत देश भक्ति भी देखने को मिली सभी अखाड़े देश की आन बान और शान तिरंगे को साथ लेकर चल रहे थे।अखाड़ा दलों ने रोमांचक खेलों का प्रदर्शन किया। शांति और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीओ शंभूनाथ एवं डीएसपी बिपिन कुमार खुद सड़क पर उतर कर भ्रमण करते दिखे, वही छातापुर प्रखंड के नरहिया में मुहर्रम पर्व को लेकर मेले का आयोजन किया गया था, जिसका उद्घाटन एसडीओ व डीएसपी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया,

एसडीओ व डीएसपी ने भाजी लाठी,

इस मोकै पर एसडीओ व डीएसपी ने भाईचारे को संदेश देते हुए दोनो अधिकारी ने अखाड़े पर खूब लाठिया भाजी, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, यही नहीं वे दर्जन भर से अधिक लोगों के साथ लाठी का खेल खेला। एसडीओ व डीएसपी ने सभी अखाड़ों के लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बधाई दी, एसडीओ शंभू नाथ ने कहा मुहर्रम हमें इंसानियत का पैगाम देता है,इसका एक मात्र उद्देश्य त्याग, समर्पण और सत्य मार्ग का अनुसरण तथा आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ सेवा का भाव स्थापित करना है। वही इंसानियत, प्रेम व भाईचारे के लिए शहादत का महान एवं पाक पर्व मुहर्रम है। कहीं से किसी प्रकार की अप्रिय घटना नही हुई, इस पर्व को शांतिपूर्ण संपन्न कराने को लेकर प्रत्येक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जा रहा था, सभी अखाड़े पर शांतिपूर्ण संपन्न हुआ, डीएसपी विपिन कुमार ने कहा कि मुहर्रम हमें इंसानियत का पैगाम देता है। समूह के लिए त्याग व बलिदान की भावना से ही सामाजिक जीवन की नींव मजबूत होती है। इतिहास उसी का लिखा जाता है जिसमें आत्मोत्सर्ग की भावना निहित होती है।

आइये जानते हैं क्यों मनाया जाता है मोहर्रम

मुस्लिमों के अंतिम नबी पैगंबर हजरत मोहम्‍मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोग मुहर्रम पर गम मनाते हैं। मुहर्रम महीने का दसवां दिन सबसे खास माना जाता है। बताया गया है कि मुहर्रम के महीने की 10वीं तारीख को कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इस्‍लाम की रक्षा के लिए उन्‍होंने खुद को कुर्बान कर दिया था। इस जंग में उनके साथ उनके 72 साथी भी शहीद हुए थे। लेकिन कातिल के आगे अपना सिर नहीं झुकाया। कर्बला के प्यासे शहीदों की याद में मोहर्रम का पर्व मनाया जाता है।

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