जितनी आबादी, उतनी हिस्सेदारी.. जातिगत जनगणना के बाद आरक्षण में किन बदलावों की होने लगी है मांग, जानिए क्या कहा एमआईएम के प्रवक्ता आदिल हसन..

PATNA: बिहार में जातीय जनगणना रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद लगातार कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इसके साथ ही कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। इस बीच AIMIM के प्रदेश युवा प्रवक्ता आदिल हसन ने भी जातीय जनगणना के जारी किए गये रिपोर्ट पर सवाल उठा दिया है, आदिल हसन ने कहा की कलाल ईराकी मुसलमान जाती है, लेकिन उसे हिंदू में दिखाकर मुसलमान की आबादी घटाने का काम किया है, उन्होंने कहा कि कॉलम संख्या 122 में इसे दिखाया गया है, कॉलम ईराकी की आबादी को अगर जोड़ा जाए तो मुसलमान की आबादी बिहार में 19 फ़ीसदी होगी, उन्होंने कहा कलाल ईराकी की आबादी बिहार में 10 से 15 लाख है ,उन्होंने मांग की है कि आबादी बढ़ी है तो आरक्षण का आकार भी बढ़ना चाहिए और साथ ही जिस कम्युनिटी की जितनी आबादी है, ओबीसी में उनका आरक्षण में दायरा बढ़ाना चाहिए।

आदिल हसन ने कहा की लालु यादव हमेशा कहते थे, जिसकी जितनी आबादी है, उसकी उतनी ही हिस्सेदारी होगी, लालू जी नीतीश कुमार अगर मुसलमान का भलाई करना चाहते हैं तो उन्हें भी हिस्सेदारी देनी‌ होगी, उन्होंने कहा मुसलमान ‌एवं दलित भाइयों। तो आज तक लालू जी के पूरे परिवार को वोट देकर पूरे परिवार को गद्दी पर बैठाया है, आखिर मुसलमान और दलितों को कब हिस्सेदारी मिलेगी, कितने दिनों तक मुसलमान और दलित चुप बैठेंगे, लालू जी और नीतीश जी आपने कितने मुसलमान और दलित भाइयों को राज्यसभा भेजा है , कितने मुसलमान को मंत्रिमंडल में भेजा है, कितने मुसलमान और दलित भाइयों को डिप्टी सीएम बनाया, कितने मुसलमान भाइयों को विधानसभा अध्यक्ष बनाए हैं, आखिर कब तक मुसलमानों को‌ लॉलीपॉप दीजिएगा, आदिल हसन ने यहां तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कह दिया कि आपने मुसलमानों और दलितों का वोट लेकर आठ बार मुख्यमंत्री बने हैं ,अब अगर आगे की तमन्ना है तो बिहार के मुसलमानों और दलित भाइयों को खासकर कोशी सीमांचल के मुसलमानों और दलित भाइयों को हिस्सेदारी आपको देनी होगी, इतने दिनों से आप लोगों ने मुसलमान और दलित भाइयों को आंख में धूल झोंक कर वोट लेते थे, अब मुसलमान और दलित भाइयों आप‌ लोगों की विरासत की कहानी जान चुके हैं, कि आप लोगों की कथनी और करनी में फर्क है, उन्होंने कहा नीतीश जी यह भी बताएं उर्दू अनुवाद पर आज तक क्यों नहीं बोले हैं, उर्दू टीईटी की बहाली आज तक क्यों नहीं हुआ, मुसलमानों में डीएम और एसपी की पोस्टिंग क्यों नहीं हो रहे हैं, नाही मुसलमानों में एसडीओ, डीएसपी पोस्टिंग हो रहे हैं, नहीं थाना प्रभारी, बीडीओ ,सीओ मुसलमान में पोस्टिंग हो रहे हैं अब मुसलमान अपने अधिकार के लिए लड़ेंगे, बिहार के मुसलमान और दलित भाईयो को आबादी के हिसाब जब तक उनकी हिस्सेदारी नही मिलेंगी तब तक इस वर्ग का विकास संभव नहीं है।

आदिल हसन ने कहा कलाल ईराकी की आबादी बिहार में 10 से 15 लाख है उन्होंने मांग की है की ओबीसी आरक्षण का दायर बढ़ाया जाए इसे बढ़ाकर 50% किया जाए इसमें मुसलमान का कोटा अलग से निर्धारित कर दिया जाए, बिहार सरकार अगर इमानदार है तो सर्वे की आंकड़े ही जारी नहीं करें, बल्कि जल्द इस पर एक्शन लिया जाए पॉलिसी बनाकर इसे लागू करें अगर ऐसा नहीं हुआ तो पिछड़ा दलित का आंदोलन के लिए तैयार रहना चाहिए,

मुस्लिम जातियों का आंकड़ा उजागर, बिगाड़ेगा JDU-RJD का खेल,

बिहार में मुसलमानों की आबादी 17.70 फीसदी है. कलाल ईराकी की आबादी को अगर जोड़ दिया जाए तो मुसलमानों की आबादी बिहार में 19 फ़ीसदी होगी,अगर जाति की बात करें तो यहां यादवों की आबादी है. 14.26 फीसदी है. यादवों की तुलना में राज्य में मुसलमानों की आबादी ज्यादा है,‌ लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में दोनों के बीच जमीन-आसमान का अंतर है. बिहार में ओवैसी की निशाने पर शुरू से ही बिहार की मौजूदा सियासत में आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस एक साथ हैं. ऐसे में महागठबंधन में मुस्लिम वोटों को लेकर पूरी तरह से कॉन्फिडेंस है, लेकिन ओवैसी उसमें सेंधमारी के लिए हरसंभव कोशिश में जुटे हैं. माना जाता है कि मुस्लिम वोटों की सियासत करने वाले राजनीतिक दलों से मुसलमान मायूस हैं और वो भरोसेमंद विकल्पों की तलाश में हैं. ऐसे में औवैसी मुस्लिमों को एक सियासी विकल्प देने का दावा करते हैं और उनके जुड़े मुद्दो को धार देने के साथ-साथ उनके प्रतिनिधित्व को उठा सकते हैं.

पटना से मोहम्मद गयासुद्दीन उर्फ रिंकू की रिपोर्ट 

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