सुपौल में अनुमंडलीय अस्पताल प्रभारी पर लड़की ने लगाया छेड़खानी का आरोप, जांच टीम ने इस मामले को मैनिपुलेटेड बताया, 

सुपौल: जिले की त्रिवेणीगंज पत्रकारों के मुंह पर एक बार फिर करारा तमाचा लगी है, खुद तो उन्होंने बदनाम हुआ, बशर्ते त्रिवेणीगंज पुलिस प्रशासन को भी कटघरे में खड़े दिए हैं, प्रकाशित खबर के अनुसार साफ स्पष्ट होता है कि यहां के पुलिस प्रशासन आम लोगों को न्याय नहीं दिला पाती है अब लोग न्याय के लिए दौड़े दौड़े डीएम साहब के पास पहुंच जाते हैं, मामला एक डॉक्टर और मरीज़ से जुड़ा है, दैनिक भास्कर अखबार , फर्स्ट बिहार झारखंड के पोर्टल के मुताबिक बीते 15 सितंबर को एक 13 वर्षीय नाबालिक बच्ची को जब पेट में अचानक दर्द होने लगा तब वह इलाज के लिए त्रिवेणीगंज अनुमंडल अस्पताल गई थी जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर इंद्रदेव यादव ने चेकअप के लिए बेड पर लेताया और छेड़छाड़ करने लगा, किसी तरह जान बचाकर भागी,

इस घटना को लेकर 8 अक्टूबर को बड़ी प्रमुखता से दैनिक भास्कर अखबार और (फर्स्ट बिहार झारखंड )पोर्टल पर खबर प्रकाशित की गई, खबर में जिला अधिकारी सुपौल से पीड़ित ने आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की गई थी, जिलाधिकारी के आदेश अनुसार 10 अक्टूबर को दो सदस्यीय टीम ने इस मामले की जांच के लिए त्रिवेणीगंज अनुमंडल अस्पताल पहुंचे,

जांच टीम ने सबसे पहले अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज पहुंची जहां आरोपी प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. इन्द्रदेव यादव से पूछताछ की और उनका बयान दर्ज कराया। वही जरूरी रजिस्टर को भी खंगाला। इतना ही नहीं टीम ने पीड़ित और उसके परिजनों से मिलने त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के लतौना कशहा गांव पहुंची और पीड़िता की काफी खोजबीन की लेकिन जांच टीम को ना तो पीड़िता से मुलाकात हो पाई और नाही उसके पिता के बारे में किसी ने बताया, दो सदस्यीय जांच टीम में डॉ.अजय कुमार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी और जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ.ममता कुमारी शामिल थे।

जांच टीम ने बताया गया कि 13 वर्षीया नाबालिग लड़की ने त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. इंद्रदेव यादव पर संगीन आरोप लगाया था। इस बात की शिकायत सुपौल डीएम से की थी। मामला सामने आने के बाद इसकी जांच के लिए टीम पहुंची थी। दोनों पक्षों से बात करने की कोशिश की गयी। इस दौरान एक पक्ष से तो मुलाकात हुई लेकिन पीड़ित पक्ष के किसी भी सदस्य से बातचीत नहीं हो पाई। जांच टीम को ना तो लड़की का पता चला और ना ही परिजनों के बारे में ही जानकारी मिल पाई। जिसके बाद जांच टीम खाली हाथ लौट गई। जांच टीम ने इस मामले को मैनिपुलेटेड बताया।


मैनिपुलेटेड मतलब : ऐसा कोई भी मीडिया जिसे जानबूझकर भ्रामक रूप से बदल दिया गया हो या उसमें हेरफेर किया गया हो, उसे मैनिपुलेटेड मीडिया कहा जाता है। इस तरह के मीडिया में वीडियो, ऑडियो और इमेज शामिल हैं।

हैरानी की बात यह कि  8 दिसंबर को जो पत्रकार खबर प्रकाशित किया गया था, पुनः वही पत्रकार जांच टीम से बयान लेने पहुंचे, इन पत्रकारों को तो पता होना चाहिए था कि आवेदक कहां के है, क्योंकि इनके द्वारा 8 अक्टूबर को खबर प्रकाशित किया गया था तो फिर जांच टीम को क्यों नहीं बताया , अगर पीड़ित परिवार का पता नहीं था तों फिर एक डॉक्टर पर इस तरह के भ्रमीक खबर किस उद्देश्य से प्रकाशित किया था,

सवाल: पीड़िता के द्वारा सुपौल डीएम को आवेदन दिया गया तो सुपौल के पत्रकार क्यों नहीं खबर प्रकाशित किया, आखिर त्रिवेणीगंज पत्रकारों को क्यों खबर प्रकाशित करना पड़ा, क्या इन सब की साजिश नहीं है, जब पीड़ित का कोई आता पता नहीं था तो फिर इन पत्रकार महोदय के द्वारा कैसे खबर को प्रकाशित किया गया, ऐसे में देश के भरोसेमंद दैनिक भास्कर अखबार और( फर्स्ट बिहार झारखंड) पोर्टल पर लोग कैसे विश्वास करेंगे, क्या इसमें दोषी त्रिवेणीगंज के पुलिस प्रशासन नहीं है, जो आए दिन तथाकथित पत्रकारों के द्वारा फर्जी खबर परोसा जाता है, उसके बावजूद उन्हें त्रिवेणीगंज प्रशासन स्वागत में लगे रहते हैं,

डीएम साहब आपके आदेश अनुसार जांच तो हो गई लेकिन इस आवेदन देने वाले और इस तरह की साजिश कर्ता और भर्मिक खबर परोसने वाले पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए , आखिर इस साजिश में कौन- कौन लोग शामिल है, अगर इस तरह की घटना हुई तो स्थानीय थाना में क्यों नहीं आवेदन दिया, अगर थाना वाला नहीं सुनी तो स्थानीय एसडीओ ,डीएसपी को क्यों नहीं आवेदन दिया , दौड़े दौड़े आप तक पहुंचे, क्या इस तरह की खेल त्रिवेणीगंज में कब तक चलता रहेगा,

इस मामले को ले शिवसेना के उत्तर बिहार प्रमुख रामदेव यादव ने डीएम और एसपी सुपौल से इन साजिश कर्ता एवं भर्मिक खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर कठोर कार्यवाई की मांग की है उन्होंने कहा ऐसे पत्रकारों के द्वारा बिना पुख्ता सबूत के खबर को प्रकाशित किया जाता है, जिससे समाज में गलत मैसेज जाते हैं और पदाधिकारी भी बदनाम होते हैं नेक ईमानदार पदाधिकारी को बदनाम किया जाता है, अगर इन लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पत्र के माध्यम कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को लिखा जाएगा,

सुपौल से संवादाता मोहम्मद रहमतुल्ला की रिपोर्ट 

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