त्रिवेणीगंज बीडीओ पंकज कुमार की लापरवाही के कारण आरटीआई के तहत तीन माह बाद भी नहीं मिली सूचना, आवेदक ने दो रुपए प्रति पृष्ठ शुल्क भी जमा कर दिए, उसके बाद भी नहीं मिली सूचना,

सुपौल : जिले के त्रिवेणीगंज सरकारी दफ्तरों में भले ही सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत लोक सूचना पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कर दी गयी हो पर इन दफ्तरों से कोई भी सूचना हासिल कर पाना आम लोगों के लिए सहज बात नहीं है। ज्यादातर लोक सूचना पदाधिकारी चाहे-अनचाहे आवेदकों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने में दिलचस्पी नहीं लेते। जिस कारण आवेदकों को वाछित सूचना के लिए या तो संबंधित विभाग का चक्कर लगाना पड़ता है या फिर थक हार कर सूचना आयोग के शरण में जाना पड़ता है।

इसकी बानगी देखिए, त्रिवेणीगंज प्रखंड के मानगंज पश्चिम निवासी मोहम्मद पप्पू आलम ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत पहले चरण से आज तक कुल कितने वाहन किन-किन लाभार्थी को उपलब्ध कराया गया, कितने वाहन में‌ निजी नंबर का निबंधन कराया गया, कितने ‌‌वहन में व्यावसायिक नंबर का निबंधन कराया गया, वाहन मालिक का नाम वाहन की प्रकार निबंधन संख्या से संबंधित सूचना अनुमंडल पदाधिकारी त्रिवेणीगंज से 25/7/23 को निबंधित डाक द्वारा आवेदन देकर मागी थी।

जहां से उनका आवेदन संबंधित त्रिवेणीगंज अनुमंडल पदाधिकारी सह लोक सूचना पदाधिकारी ज्ञापन 13/92 दिनांक 11/8/23 को पत्र जारी कर प्रखंड विकास पदाधिकारी त्रिवेणीगंज को यह कहकर स्थानातरित कर दिया गया, कि वाछित सूचना इस कार्यालय के क्षेत्राधीन उपलब्ध नहीं है। चुकी यह आपके विभाग/ कार्यालय से क्षेत्राधिकार में है, इसे आवश्यक कार्यार्थ आपको हस्तांतरित किया जाता है,

इधर सूचना को लेकर आवेदक पिछले तीन महीने से प्रखंड विकास पदाधिकारी सह लोक सूचना पदाधिकारी त्रिवेणीगंज के दफ्तर का चक्कर लगाता रहा है, उसके बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी पंकज कुमार ने अपने लेटर पैड पर पत्रांक 16/39 दिनांक 3/10/23 को पत्र जारी कर कहा वांछित सूचना कुल 159 पंक्तियों में है, नियम अनुसार दो रुपए प्रति पृष्ठ के दर से सूचना प्राप्त करने हेतु शुल्क प्रखंड नजारत में जमा करने को कहा गया, आवेदक ने प्रखंड विकास पदाधिकारी सह लोक सूचना पदाधिकारी के आदेश को अनुपालन करते हुए 13/10/23 को प्रखंड नजारत कार्यालय में 318 रुपया शुल्क जमा कर दिया, जिसका नजीर रसीद भी प्राप्त है,

शुल्क जमा करना 13 रोज बीत गए हैं, लेकिन उसे अबतक वाछित सूचना नहीं उपलब्ध करायी जा सकी है। सूचना नहीं उपलब्ध कराना सवाल भी खड़े हो रहे हैं, इससे प्रतीत होता है की नीतीश कुमार की सपना‌ सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की बीडीओ पंकज कुमार जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है, जबकि आरटीआई के नियम के अनुसार तीन दिवस में सूचना उपलब्ध करना अनिवार्य है,आवेदक पप्पू आलम ने सूचना आयोग के शरण में जाने का निश्चय किया है। आवेदक ने बताया यह बीडीओ पंकज कुमार और उनके लिपिक सहायक सरोज कुमार झा सूचना उपलब्ध कराने के बजाय झूठे मामलों में फंसाकर परेशान करने की ताक में रहते है और मौका पाकर ऐसा करने में कामयाब भी हो जाते हैं। इन बीडीओ से जुड़ी कुछ ऐसा भी मामला है जो आगे की खबर में उजागर किया जाएगा,

सुपौल से संवादाता मोहम्मद रहमतुल्ला की रिपोर्ट

 

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