त्रिवेणीगंज अंचल कार्यालय में लचर कार्य-संस्कृति का आमजन कोपभाजन बन रहे हैं, सरकारी दस्तावेज की सुरक्षा चल रही है भगवान भरोसे

SUPAUL: सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अंचल कार्यालय में रखे बहुमूल्य सरकारी दस्तावेज की सुरक्षा इन दिनों भगवान भरोसे है, करोड़ों रुपए की जमीन के रिकॉर्ड पूरी तरह से असुरक्षित है, इस कार्यालय में प्रतिनियुक्त कर्मी हमेशा कार्यालय से गायब रहते हैं जो तस्वीर के माध्यम से आप देख सकते हैं, किस तरह सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा की जाती है, एक और तस्वीर में आप देख सकते हैं की सरकारी दस्तावेज से भरी कार्यालय में संतोष कुमार दास के द्वारा सरकारी दस्तावेज का छेड़छाड़ किया जाता है जबकि वहां पर कोई कर्मी मौजूद नहीं था, कार्यालय सुनसान था, ऐसा लग रहा है कि संतोष कुमार दास किसी पद पर पदस्थापित हो,‌ संतोष कुमार दास कोई आम आदमी नहीं है यह फर्जीवाड़े गिरोह की सरगना है इन पर कई इल्जाम पुर्व में लग चुके हैं और स्थानीय थाने में कई संगीन मुकदमा चल रहे हैं,

इनके सहारे दस्तावेज से भरी कार्यालय को छोड़ देना अपने आप में बड़ा सवाल है, कार्यालय में लचर कार्य-संस्कृति का आमजन कोपभाजन बन रहे हैं। कार्यालय के विभिन्न प्रकोष्ठों में खाली पड़ी कुर्सियां कर्मियों की लापरवाही व मनमानी की बानगी पेश कर रही थी। इस कार्य-संस्कृति से आम जन की परेशानी का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। कार्यालय तो खुल गया लेकिन, एक भी कर्मचारी के दर्शन तक नहीं हुए। अधिकारी के संरक्षण में गैर सरकारी लोग कर्मचारी के दायित्वों का निर्वहन करते नजर आते हैं. मजबूरी में लोगों को अपने कार्य के लिए इन दलालों को ही सहारा लेना पड़ता है।

सबसे अहम बात यह है किसके आदेश अनुसार तथा किन कारण वस दस्तावेज से भरे कार्यालय में कर्मी अनुपस्थित थे, और सरकारी दस्तावेज को संतोष कुमार दास छेड़छाड़ कर रहे थे, ऐसे गैर सरकारी, गैर जिम्मेदर लोगों को सरकारी दस्तावेज से छेड़छाड़ करने का हक देना कैसे न्यायसंगत है। आम लोगों को सुविधा मुहैया कराने के लिए सरकारी स्तर पर हर तरह की कवायद की गई है। इस कवायद के तहत अलग-अलग विभाग के लिए बि¨ल्डग, विभागीय अधिकारी व कर्मियों के लिए कक्ष सहित अन्य तरह की व्यवस्थाएं भी की गई है। कार्यों के ईमानदारी से ससमय निष्पादन के लिए वेतन सहित अन्य सुविधाएं भी इन अधिकारी व कर्मियों को दी जाती है।

परंतु अधिकांश अधिकारी व कर्मी ससमय कार्यालय नहीं आ पाते हैं। या कार्यालय खोलकर गायब रहते हैं खास बात यह कि जो ससमय कार्यालय आते भी हैं, उनमें से कुछ कार्य निष्पादन करने की बजाय कुर्सी पर ही आराम फरमाते हैं। इन सारे सवाल पर अंचलाधिकारी दिनेश प्रसाद के दूरभाष नंबर पर कॉल कर जानकारी लेना चाहा लेकिन अंचल अधिकारी के द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया,

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