राज्यसभा चुनाव के लिए मुस्लिम प्रत्याशी न बनाने पर भड़के AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन, तेजस्वी यादव की लगाई क्लास,

बिहार: राज्यसभा चुनाव में बिहार में आरजेडी ने अपने कोटे की दो राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है. आरजेडी ने मनोज झा और संजय यादव पर भरोसा जताया है. आरजेडी पार्टी ने अपने कोर वोटबैंक माने जाने वाले मुस्लिम समुदाय से किसी को भी प्रत्याशी नहीं बनाया है, जिसके चलते सवाल भी उठ रहे हैं. ऐसे में आरजेडी क्या अपनी मुस्लिम परस्त छवि से बाहर निकलने की कोशिश में है, जिसकी वजह से राज्यसभा चुनाव में दांव नहीं खेला, बिहार में 18 फीसदी मुस्लिम है.बिहार में मुस्लिम समुदाय नब्बे के दशक से आरजेडी के साथ जुड़े हैं. मुस्लिम वोटों के सहारे बिहार में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी सीएम रही तो उनके बेटे तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम बनने में कामयाब रहे. एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण के सहारे लंबे समय से सियासत करती रही है और उसके सहारे सत्ता पर काबिज भी होती रही हैं, लेकिन 2014 के बाद से सियासी समीकरण बदल गए. आरजेडी अपनी मुस्लिम परस्त वाली छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे है ,(पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) पर काम कर रही वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी एम-वाई समीकरण की जगह पर ए-टू-जेड की पार्टी बता रहे. इस तरह से तेजस्वी आरजेडी को सर्व समाज की पार्टी बना रहे हैं. ऐसे में आरजेडी ने राज्यसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय से प्रत्याशी नहीं बनाया तो यह सवाल भी उठने लगे हैं.

राज्यसभा चुनाव के लिए मुस्लिम प्रत्याशी न बनाने पर भड़के AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन, तेजस्वी यादव की जमकर क्लास लगाई है कहा कि दो राज्यसभा सीटों पर में से एक पर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा. लेकिन वोट चाहिए पूरा का पुरा मुसलमानों का.आरजेडी ने जिस तरह राज्यसभा का टिकट दिया उसे देखकर ऐसा लगता है कि अब लालू और तेजस्वी यादव को अल्पसंख्यक की ज़रूरत नहीं है, वहीं आरजेडी ने राज्यसभा के लिए संजय यादव और मनोज झा को अपना उम्मीदवार बनाया है. आरजेडी ने अहमद अशफाक करीम ड्राॉप करके संजय यादव को अपना कैंडिडेट बनाया है. मनोज झा का राज्यसभा जाना पहले से करीब-करीब तय माना जा रहा था, लेकिन अशफाक करीम को लेकर शुरू से संशय था. संजय यादव पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के रणनीतिकार माने जाते हैं और लंबे समय से तेजस्वी के साथ काम कर रहे हैं. वे मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं और तेजस्वी यादव के मित्र होने के साथ-साथ इनके राजनीतिक सलाहकार माने जाते हैं.

लालू यादव जी के राजद और तेजस्वी यादव की राजद ज़मीन आसमान का अंतर है, 

AIMIM के यूथ विंग के बिहार राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन यही नहीं रूकी कहा कि आरजेडी मुस्लिमों का वोट तो लेना चाहती है, लेकिन राजनीति में उन्हें हिस्सेदारी नहीं देना चाहती है. बीजेपी जिस तरह से मुस्लिम सियासत को खत्म करने पर लगी है, उसे आरजेडी भी आगे बढ़ा रही है. आरजेडी मुस्लिम वोटों के दम पर ही बिहार में अपने दो राज्यसभा भेजने की स्थिति में है और उनका ही टिकट काट दिया. आरजेडी अब मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व नहीं देना चाहती है और बीजेपी के नक्शेकदम पर ही चल रही हैं.
राज्यसभा चुनाव में आरजेडी ने यादव और ब्राह्मण समुदाय पर दांव खेला है, लेकिन मुस्लिम समुदाय को नजरअंदाज किया है, आने वाले चुनाव में इसका मुंहतोड़ जवाब अवाम देंगे, मजलिस गरीबों मजलूमों और मुसलमानो की नहीं बल्कि कमजोरो की बात करती हैं,

यादव और ब्राह्मण समुदाय पर खेला दांव

राज्यसभा चुनाव में आरजेडी ने यादव और ब्राह्मण समुदाय पर दांव खेला है, लेकिन मुस्लिम समुदाय को नजरअंदाज किया है. इसके चलते आरजेडी पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.

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